Accessibility Page Navigation
Style sheets must be enabled to view this page as it was intended.
The Royal College of Psychiatrists Improving the lives of people with mental illness

 

 

खान-पान के विकार

Eating Disorders

 

 

 

 

 

हमें आशा है कि यह सूचना पत्र आपके लिए सहायक होगा यदि आप सोचते हैं कि

  • आपका खाना या परहेज (Dieting) आपके लिए एक समस्या है।
  • आप सोचते हैं कि आपको एनोरेक्सिया (Anorexia) अथवा बुलीमिया (Bulimia) है।
  •  दूसरे लोगों को लगता है कि आपका वजन बहुत कम हो गया है।
  •  आपके मित्र या सम्बंधित लोगों को इस प्रकार की समस्या है।

 

भूमिका

हम सबकी खाने की आदतें अलग-अलग होती हैं। हमें स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न प्रकार की खान-पान की शैलियां होती हैं। यद्यपि इनमें से कुछ ऐसी हैं जो हम मोटापे के डर से अपनाते हैं परन्तु वह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। यह ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorders) कहलाती हैं। इनके अंर्तगत निम्नलिखित बातें आती हैं-        

  •  अत्यधिक खाना
  •  बहुत कम खाना
  •  कैलोरीज घटाने के लिए हानिकारक तरीके अपनाना।

यह सूचना पत्र दो ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) के सम्बन्ध में है-

  •  एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa)
  •  बुलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa)

 

       यहां दोनों विकारों का अलग-अलग वर्णन है अक्सर एनोरेक्सिया (Anorexia) और बुलीमिया (Bulimia) के लक्षण एक से लगते हैं - कुछ लोगों के अनुसार वे बुलीमारेक्सिया (Bulimarexia) से ग्रसित हैं।     

                               

इन लक्षणों का रूप समय के साथ बदल सकता है - शुरूआत में एनोरेक्सिया (Anorexia) के लक्षण बाद में बुलीमिया (Bulimia) के लक्षणों में परिवर्तित हो सकते हैं।

 

ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) किन लोगों को हो सकता है?

किशोर लड़कियों और स्त्रियों में, लड़कों और पुरूषों की अपेक्षा एनोरेक्सिया अथवा बुलीमिया होने की संभावना दस गुना ज्यादा होती है। हालांकि अब यह पुरूषों में भी आमतौर पर पाया जाने लगा है। जो बचपन में मोटापे से ग्रसित होते हैं उनमें ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorders) होने की संभावना ज्यादा होती है।

 

एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa)

लक्षणः-

  • आप अपने वजन को लेकर अत्यधिक चिंतित रहते हैं।
  • कम से कम खाते हैं।
  • कैलोरीज घटाने के लिए अत्यधिक व्यायाम करते हैं।
  • यह जानते हुये कि उम्र और लंबाई के हिसाब से आपका वजन कम है फिर भी वजन कम करने पर रोक नहीं लगा सकते।
  • अपना वजन कम करने के लिए धूम्रपान करते हैं या गम (Gum) चबाते हैं।
  • यौन सम्बन्ध में रूचि नहीं रहती।
  •  किशोर लड़कियों या स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितता या बंद होना।
  •  किशोर लड़कों और पुरूषों में तनाव (Erection) व स्वप्नदोष (Wet Dreams) की कमी और अंडकोष का सिकुड़ना।

 

यह कब शुरू होता है?

यह आमतौर पर किशोरावस्था में शुरू होता है। इससे ग्रसित हैं लगभग -

  • 15 वर्ष की उम्र में 150 में 1 लड़की।
  • 15 वर्ष की उम्र में 1000 में 1 लड़का।
  •  यह बचपन या युवावस्था में भी शुरू हो सकता है।

 

इसमें क्या घटित होता है?

  • आप प्रतिदिन कम कैलोरीज लेते हैं। हालांकि आप स्वास्थ्यवर्धक भोजन जैसे फल, सब्जियां, सलाद लेते हैं परन्तु इससे आपके शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती।
  • आप वजन घटाने के लिए अत्यधिक व्यायाम करते हैं, वजन घटाने के लिए गोलियां खाते हैं या धूम्रपान करते हैं।
  • आप दूसरों के लिए खाना बनाते हैं, खरीदते हैं परन्तु स्वयं नहीं खाना चाहते।
  • आप हमेशा भूख महसूस करते हैं और खाने के बारे में सोचते रहते हैं।
  • आपको हमेशा वजन बढ़ने का डर बना रहता है और आप अपना वजन सामान्य से कम रखने का
  • दृढ़संकल्प करते हैं।
  • आपका परिवार शायद सबसे पहले आपका घटा हुआ वजन और दुबलापन देख पाता है।
  • आप अपने कम खाने और वजन के बारे में दूसरों से झूठ कहते हैं।
  • आप बुलीमिया (Bulimia) के भी कुछ लक्षण महसूस कर सकते हैं। किसी दूसरे बुलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa) से ग्रसित व्यक्ति के विपरीत आपका वजन बहुत कम बना रहता है।

 

बुलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa)

लक्षणः-

  • आप अपने वजन के बारे में अत्यधिक चिंतित रहते हैं।
  • आप जरूरत से ज्यादा खाते हैं।
  • आप कैलोरीज घटाने के लिए उलटियां करते हैं अथवा विरेचक औषधि (Laxative) का प्रयोग करते हैं।
  • अनियमित मासिक धर्म।
  • आप थकान महसूस करते हैं।
  • आप अपराधी महसूस करते हैं।
  • परहेज करने के बावजूद वजन सामान्य रहता है।

 

यह कब शुरू होता है?

बूलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa) की शुरूआत मध्य किशोरावस्था में होती है। प्रायः लोग इसके लिए 20-25 वर्ष से पहले किसी प्रकार की सहायता नहीं लेते हैं क्योंकि तब तक वे इसे छुपाने में सक्षम होते हैं। जबकि यह उनके रोजमर्रा के काम और सामाजिक जीवन में बुरा प्रभाव डालता है। इसके लिए वे तभी सहायता लेते हैं जब उनके जीवन में किसी प्रकार का बदलाव आता है जैसे - नये रिश्तों की शुरूआत या नये लोगों के साथ रहना।

 

       लगभग प्रत्येक 100 में 4 औरतें जीवन के किसी पड़ाव पर बुलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa) से पीड़ित होती हैं। इसकी अपेक्षा पुरूषों की गिनती कम है।

 

अत्यधिक खाना (Bingeing)

अपनी ज्यादा खाने की मजबूरी को शान्त करने के लिए आप फ्रिज में रखा सामान निकालकर या बाजार से तैलीय पदार्थ या ज्यादा कैलोरी वाला खाना खरीदकर दूसरों से छिपकर जल्दी-जल्दी खाते हैं। इसके लिए बिस्किट, चाकलेट्स के पैकेट और केक सभी चीजें कुछ ही समय में खा लेते हैं। इस आदत के कारण आप दूसरों का खाना भी खा सकते हैं या फिर दुकान से उठाकर भी खा सकते हैं।

 

बाद में आप खुद को भरा हुआ और पेट फूला हुआ महसूस करते हैं- और संभवतः स्वयं को दोषी और दुखी महसूस करते हैं। फिर इससे छुटकारा पाने के लिए आप विरेचक औषधियों के प्रयोग से या उल्टियों से अपने आप को बीमार कर लेते हैं। यह बहुत कष्टप्रद और थकान भरा है। परन्तु आप स्वयं को इस ज्यादा खाने, फिर उल्टियां करने के दुष्चक्र से निकाल नहीं पाते हैं और इस दिनचर्या के लिए मजबूर हो जाते हैं।

 

बिंज ईटिंग डिसआर्डर (Binge Eating Disorder)

हाल ही में यह ज्ञात हुआ है कि यह भी एक स्वभाव का स्वरूप है। इसमे डाइटिंग (Dieting) और बिंजिंग (Bingeing) तो शामिल हैं पर उल्टियां नही। यह दुखद है पर बुलीमिया से कम हानिकारक है। इससे पीड़ित लोगों में मोटापा होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

 

बुलीमिया (Bulimia)और एनोरेक्सिया (Anorexia) आपको कैसे प्रभावित करते हैं?  

 यदि आपको पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल रही हैं तो आपमें निम्नलिखित लक्षण मिल सकते हैं -

मनोवैज्ञानिक लक्षणः-

  • नींद में खराबी।
  • खाने और कैलोरी के बारे में सोचने के अतिरिक्त कुछ भी स्पष्ट सोचने या ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी।
  • दुखी रहना।
  • दूसरों में रूचि न रहना।
  • खाना और खाने की सनक (कभी-कभी दूसरी चीजों की भी, जैसे -सफाई, धुलाई आदि)

शारीरिक लक्षणः-

  • पेट सिकुड़ जाने के कारण खाने में परेशानी।
  • शरीर का चयापचय (Metabolism) कम हो जाने के कारण थकान, कमजोरी या ठंड महसूस करना।
  • कब्ज होना।
  • पूरी लम्बाई तक न बढ़ना।
  • हड्डियों का नाजुक होना जिससे वे टूट सकती हैं।
  • गर्भधारण करने में असमर्थ होना।
  • यकृत (Liver) का नष्ट होना, विशेष रूप से यदि शराब पीते हैं।
  • अंत दशा में मर भी सकते हैं। मनोवैज्ञानिक कारण से मृत्यु की दर सबसे ज्यादा एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa) के कारण ही है।

यदि आप उल्टी करते हैं तो हो सकता है:-

  • दाँत का इनेमल (Enamel) कम हो जाये। (यह उल्टी करते समय पेट के तेजाब से घुल जाता है।)
  • सूजा हुआ चेहरा। (स्वाद ग्रंथियां गालों में फूल जाती हैं।)
  • असामान्य दिल की धड़कन महसूस करना (Palpitation) (उल्टी के कारण खून में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ जाने से।)

कमजोरी महसूस करना।

  • गुर्दों को क्षति पहुंचना।
  • मिर्गी के दौरे पड़ना।
  • गर्भधारण करने में असमर्थ होना।

विरेचक औषधि के नियमित प्रयोग से:-

  • पेट में लगातार दर्द रहना।
  • उंगलियों में सूजन होना।
  • रोजाना शौचालय जाने के लिए इस पर निर्भर रहना। (रोजाना इसके प्रयोग से आंतो की माँसपेशियो को नुक्सान पहुंचता है।)
  • वजन का बहुत घटना या बढ़ना। (विरेचक औषधियों के नियमित प्रयोग से पानी शरीर से निकल जाता है। पर पानी पीने पर वही मात्रा वापस हो जाती है। इसके प्रयोग से कैलोरी नहीं घटती है।)

 

ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder)के क्या कारण हैं?

इसका कोई एक उत्तर नही है, इसके कई कारण हो सकते हैं -

 

सामाजिक दबाव (Social Pressure):-

       हमारा आचरण/व्यवहार हमारी सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता है। जिस समाज में दुबलेपन को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता वहां ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) कम पाया जाता है। जहां इसका बहुत महत्व है जैसे बैले स्कूल (Ballet School) वहां यह विकार ज्यादा है। पाश्चात्य सभ्यता में दुबला होना सुन्दरता का प्रतीक है। अखबार और पत्रिकायें आमतौर पर कृत्रिम और आदर्श लोगों की बनावटी सुन्दरता प्रस्तुत करते हैं। कभी न कभी हम सब पतले होने के लिए खाने में परहेज करते हैं और कुछ बहुत ज्यादा डाइटिंग (Dieting) के कारण ऐनोरेक्सिया (Anorexia) के शिकार हो जाते हैं।

 

फ’ स्विच ('Off' Switch)की कमी होना:-

       हममें से कुछ लोग उस समय तक ही भूखे रह सकते हैं जब तक हमारा शरीर दुबारा खाने के लिए संकेत नहीं करता। एनोरेक्सिया (Anorexia) से ग्रसित कुछ लोगों में इस प्रकार का संकेत करने वाला ‘स्विच’ नहीं होता जिसके कारण वह अपना वजन बहुत समय तक बहुत कम रख सकते हैं।

 

संयम/नियंत्रण (Control) :-

परहेज (Dieting) करना बहुत संतोषजनक हो सकता है। जब मशीन हमें वजन में कुछ कमी दिखाती है तो हममें से कुछ लोगों को खुशी महसूस होती है जैसे कि कोई बहुत बड़ी उपलब्धि प्राप्त कर ली हो। इस तरह अपनी इच्छाशक्ति को साफ-साफ देखना हमें बहुत अच्छा महसूस कराता है। आपको ऐसा महसूस होता है कि जैसे वजन ही जीवन का ऐसा भाग है जिस पर आपका नियंत्रण है।

 

यौवन (Puberty):-

उम्र बढ़ने से शरीर में होने वाले परिवर्तन ऐनोरेक्सिया से कुछ हद तक कम हो सकते हैं, जैसे कि पुरूषों में चेहरे और जघन के बाल, स्त्रियों में स्तन का विकास और मासिक धर्म। प्रौढ़ होने की अपेक्षा खास तौर पर यौन सम्बंधित अपेक्षाओं को हरा सकता है।

 

परिवार:-

परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ भोजन करना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण भाग है। खाना ग्रहण करना आनन्द भी देता है और मना कर देना कुछ लोगों को नाराज कर देता है। यह खासकर परिवार के सदस्यों के अंर्तगत ही होता है। आप अपनी भावनाओं/नाराजगी को जताने के लिए खाने को मना कर देते हैं और ‘मै खाना नहीं खाऊंगा’ या ‘मुझे भूख नही है’ कहकर परिवार में अपना महत्व दर्शाते हैं।

 

अवसाद (Depression):-

हममें से ज्यादातर लोग परेशान होने पर अधिक खाते हैं या फिर जब ऊब रहे हों। ऐनोरेक्सिया के रोगी अक्सर दुखी या निराश हो जाते हैं और शायद अपने दुख या निराशा से निजात पाने के लिए हर समय कुछ न कुछ खाते रहते है। दुर्भाग्यवश, उल्टियां करने से और विरेचक औषधियों के प्रयोग से कहीं ज्यादा उदासी या निराशा महसूस होती है।

 

हीनभावना (Low self esteem) :-

एनोरेक्सिया और बूलीमिया से ग्रसित ज्यादातर लोग अपने बारे में अच्छा नहीं सोचते और दूसरों की तुलना में अपने को कम पाते हैं। इन लोगों के लिए वजन कम करना एक उपलब्धि और आत्म मूल्य की भावना को बढ़ाता है।

 

भावात्मक विपत्ति (Emotional Distress):-

परिस्थितियां बदलने पर या कुछ बुरा होने पर हम सबकी प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है। एनोरेक्सिया (Anorexia) और बूलीमिया (Bulimia) से सम्बंधित हैं -

  • जीवन की कठिनाइयां।
  • यौन उत्पीड़न।
  • शारीरिक बीमारी।
  • परेशान कर देने वाली घटनाएं - मृत्यु या सम्बंध टूटना।
  •  महत्वपूर्ण घटनाएं - विवाह या घर छोड़ना।

 

दुष्चक्र:-

ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) प्रारंभिक परेशानी के समाप्त हो जाने के बाद भी बना रह सकता है। एक बार आपका पेट सिकुड़ जाता है तो खाना खाने में तकलीफ और डर महसूस होता है।  

 

शारीरिक कारण:-

कुछ डाक्टर्स सोचते हैं कि इसके कुछ शारीरिक कारण हो सकते हैं जो अभी तक हम समझ नहीं पाये हैं।

क्या यह पुरूषों के लिए भिन्न है?

  • ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) लड़कों और पुरूषों में भी अब पाया जाने लगा है।
  • ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) उन व्यवसायों में ज्यादा दिखता है जहां कम वजन की ज्यादा मांग होती है। जैसे - कुश्ती, नृत्य, तैराकी, शारीरिक व्यायाम और कसरत।
  • यह हो सकता है कि आजकल पुरूष ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) के लिए सहायता लेते हैं बजाय इसके कि वे चुप रहें या इस पर ध्यान न दें।

 

विशेष जरूरतो वाले लोग व बच्चे:-

सीखने की कठिनाई, ऑटिज्म (Autism) या विकासात्मक समस्यायें खाने की आदत को अस्त व्यस्त कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर ऑटिज्म (Autism) के मरीज कुछ खाद्य पदार्थ के रंगों या उसकी बनावट को नापसंद करते हैं। इसलिए उसे खाने से मना कर देते हैं। किशोरावस्था से पहले की उम्र के बच्चे दुबले होने के लिए नहीं बल्कि अक्सर खाने की बनावट से परेशान होते हैं, खाने में मीन मेख निकालते हैं या फिर गुस्से में खाना नही खाते हैं। इनकी समस्याओं को दूर करना एनोरेक्सिया (Anorexia) या बूलीमिया (Bulimia) की समस्याओं को दूर करने से बिल्कुल अलग है।

 

क्या मुझे परेशानी है?

डाक्टर की प्रश्नतालिका के अनुसार -

  • बहुत ज्यादा पेट भरा होने पर क्या आप स्वयं को बीमार कर लेते हैं? (उल्टी करके)
  • क्या आप परेशान रहते हैं कि आपका खाने पर नियंत्रण नही है।
  • क्या आपने हाल ही में (3 महीने में) 6 किलोग्राम से ज्यादा वजन कम किया है?
  • क्या आप सोचते हैं कि आप मोटे हैं यद्यपि दूसरे आपको पतला कहते हैं।
  • क्या आपको लगता है कि खाना आपके जीवन में आप पर हावी हो रहा है या बहुत महत्वपूर्ण है।

यदि इनमें से 2-3 प्रश्नों का उत्तर हां में है तो आपके खान-पान में गड़बड़ी है।

 

स्वयं की सहायता:-

  •  कभी-कभी बूलीमिया (Bulimia) स्वयं सहायक पुस्तिका व चिकित्सक के मार्गदर्शन से अपने आप ठीक किया जा सकता है।
  • एनोरेक्सिया (Anorexia) में डाक्टर की संगठित मदद की ज्यादा जरूरत होती है। इसमें ज्यादा से ज्यादा विकल्प की जानकारी लेना अच्छा होता है जिससे आप अपने लिए सबसे सही और आसान विकल्प चुन सकें।

क्या करें:-

  • खाने का नियमित समय निर्धारित करें - नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना। यदि आपका वजन बहुत कम है तो सुबह, दोपहर, शाम कुछ नाश्ता लें।
  • खाने का एक स्वास्थ्यवर्धक तरीका सोचें। यदि आप नाश्ता नही करना चाहते तो भी नाश्ते के समय खाने की मेज पर बैठें और एक गिलास पानी पीयें। जब इसकी आदत हो जाये तो बहुत थोड़ा सा खाने को लें चाहे आधा टोस्ट ही हो परन्तु ऐसा रोज करें।
  • एक डायरी रखें जिसमें आपने क्या खाया, कब खाया, आपके प्रतिदिन के अनुभव और विचार के बारे में लिखें। इन विचारों और खाने के आपसी सम्बन्ध की आप तुलना कर सकते हैं और आप देख सकते हैं कि आपके खाने और उस दिन के विचारों, भावनाओं में क्या कुछ सम्बन्ध है?
  • आप क्या खा रहे हैं और क्या नही खा रहे हैं इसके लिए हमेशा खुद से और दूसरों से भी ईमानदार रहे ।
  • अपने आपको याद दिलाते रहे कि हमेशा आपको सफल नहीं होना है कभी-कभी नाकाम भी हो सकते हैं।
  • अपने आपको याद दिलायें कि यदि आप अधिक वजन घटाते हैं तो आप ज्यादा दुखी और बेचैन रहेंगे।
  • दो सूची बनायें - एक में खाने की गड़बड़ी से आपको क्या प्राप्त हुआ, दूसरा आपने खाने में गड़बड़ी से क्या खोया। स्वयं बनायी गयी सूची आपके लिए फायदेमंद होगी।                 
  • अपने शरीर के प्रति सहानुभूति रखें, उसे सजा न दें।
  • यह जानें कि आपका सही वजन क्या होना चाहिए ओर उसे समझें।
  • दूसरे लोगों की इस बीमारी से उभरने और स्वास्थ्य लाभ की कहानियां पढ़ें। ये आप को इंटरनेट पर मिल जायेंगी।
  • एक स्वयं सहायक समूह में शामिल हों। आपका चिकित्सक आपको कोई नाम बता सकता है या आप किसी भोजन विकार एसोसियेशन से संपर्क कर सकते हैं।
  • उन वेबसाइट्स (Websites) से बचें जो वजन कम करने के लिए उत्साहित करें और बहुत कम वजन के लिए प्रेरित करें। इससे आपके स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचता है और जब आप बीमार हो जाते हैं तो ये आपकी कोई सहायता नहीं कर सकते।

न करें:-

  • एक हफ्ते में एक बार से ज्यादा वजन न करें।                                       
  • शीशे में अपने शरीर को देखने और जांचने में समय बर्बाद न करें।
  • कोई भी परिपूर्ण नही होता। जितना आप अपने आपको देखेंगे उतनी ही कमियां आपको स्वयं में दिखेंगी। बहुत खूबसूरत व्यक्ति भी अपने आपको यदि हर समय जांचता है तो वो भी नाखुश हो सकता है।
  • स्वयं को परिवार और मित्रों से दूर न करें। वे सोचते हैं कि आप बहुत दुबले हैं इससे आप उनसे दूर होना चाहते हैं परन्तु उनका सोचना आपके लिए जीवनदायक भी हो सकता है।

 

क्या होगा यदि मेरे पास कोई सहायता नही है या मै अपने खाने-पीने की आदतें नही बदलता:-

बहुत से लोग जो ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) से ग्रसित हैं उन्हें इलाज की जरूरत पड़ती है। अतः यह स्पष्ट नही है कि अगर कुछ न किया गया तो क्या होगा? फिर भी ऐसा देखा गया है कि बहुत गंभीर ईटिंग डिसआर्डर (Eating Disorder) स्वयं ठीक नही होते। कुछ एनोरेक्सिया (Anorexia) से पीड़ित व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है। इसकी संभावना उनमें कम होती है जो उल्टी नहीं करते, विरेचक औषधि नही लेते और शराब का सेवन नही करते।

 

चिकित्सक परामर्श:-

  • आपका चिकित्सक आपको विशेषज्ञ सलाहकार, मनोरोग चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक के पास भेज सकता है।   
  • आप एक निजी चिकित्सक, स्वयं सेवी संस्था और चिकित्सालय चुन सकते हैं, परन्तु फिर भी अपने चिकित्सक को बताते रहने में ही सुरक्षा है।
  • अपने स्वास्थ्य का पूर्ण परीक्षण कराते रहने में ही बुद्धिमानी है, आपके खाने में बदपरहेजी आपके शारीरिक समस्याओं का कारण हो सकती हैं। कभी-कभी अपरिचित चिकित्सीय अवस्था भी हो सकती है। 
  • सबसे उपयोगी इलाज आपकी बीमारी के खास लक्षण, उम्र और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। 

 

एनोरेक्सिया (Anorexia)के लिए:-

  • एक मनोरोग चिकित्सक आपसे बात करना चाहेंगे, यह जानने के लिए कि आपकी समस्या कब शुरू हुयी तथा कैसे बढ़ी? आपका वजन लिया जायेगा, आपका कितना वजन घटा है इसको देखते हुये आपका परीक्षण और खून की जांच होगी। आपकी इजाजत से आपका चिकित्सक आपके परिवार वालों या मित्रों से बात करना चाहेगा जिससे आपकी समस्या को वह अच्छी तरह समझ सके। कभी-कभी आप अपने परिवार का दखल नही चाहते। ’एक तरह से यह ठीक भी है, उनमें जिनके परिवार में दुःव्यवहार या परेशानियां रहती हैं। (युवा रोगियों को गोपनीयता का अधिकार है।)
  • यदि आप अभी घर में रह रहे हैं, तो सबसे पहले आपके माता-पिता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है कि वे जानें कि आप क्या खा रहे हैं। इसमें शामिल है आपका नियमित रूप से परिवार के सदस्यों के साथ खाना और पर्याप्त कैलोरी प्राप्त करना। एक चिकित्सक आपको नियमित रूप से देखेगा, आपका वजन जांचने के लिए और प्रोत्साहन के लिए।
  • इस तरह का व्यवहार आपसे संबंधित लोगों के लिए तनावपूर्ण हो सकता है अतः आपके परिवार को सहायता की आवश्यकता हो सकती है। परन्तु यह जरूरी नहीं कि इसके लिए पूरा परिवार चिकित्सक के पास परामर्श के लिए आये (हालांकि यह छोटे लोगों के लिए लाभप्रद हो सकता है।) इससे आपके परिवार को आपकी समस्या समझने और इसका सामना करने में मदद मिल सकती है।
  • आपको अपनी बात की चर्चा करने का अवसर मिल जायेगा जो आपको परेशान कर रही है, जैसे - विपरीत सेक्स, स्कूल, आत्म-चेतना, पारिवारिक समस्यायें।
  • सबसे पहले आप शायद अपने सामान्य वजन को वापस पाने के लिए सोचना नही चाहते साथ ही साथ आप बेहतर महसूस करना चाहते हैं। बेहतर महसूस करने के लिए आपको स्वस्थ वजन की आवश्यकता होगी। इसके लिए आपको यह जानने की आवश्यकता होगी -
  • आपका स्वस्थ वजन क्या है? उस वजन को पाने के लिए प्रतिदिन कितनी कैलोरी की आवश्यकता है?
  • आप कैसे सुनिश्चित करें कि आप मोटे न हों?
  • आप कैसे सुनिश्चित करें कि आप अपने खाने पर नियंत्रण कर सकते हैं?

 

मनोचिकित्सा या परामर्श:-

  •  इसमें शामिल है चिकित्सक के साथ एक हफ्ते में कम से कम एक घंटा अपने विचारों और भावनाओं के बारे में बातें करना। यह समस्या कैसे शुरू हुयी और कैसे आप अपने सोचने और महसूस करने की समस्या को सुलझा सकते हैं, इसमें यह सहायता मिलती है। कुछ चीजों के बारे में बात करना परेशान कर सकता है परन्तु अच्छा चिकित्सक इसका अच्छी तरह से सामना करने में आपकी सहायता कर सकता है। ये आपको, आपके महत्व को समझने में तथा आत्मसम्मान को फिर से मजबूत करने में सहायता कर सकता है।
  • कभी-कभी यह एक ही समस्या से ग्रसित लोगों के छोटे-छोटे समूह में भी की जा सकती है।
  • आपकी अनुमति से आपके परिवार के सदस्यों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। उनसे अलग से भी मिलकर बात की जा सकती है यह समझाने के लिए कि आपको क्या हुआ है। वे कैसे आपके साथ मिलकर काम कर सकते हैं और कैसे इस परिस्थिति का सामना कर सकते हैं।
  • इस तरह का उपचार महीनो और सालों के लिए हो सकता है।
  • डाक्टर/चिकित्सक अस्पताल में प्रवेश/भर्ती का सुझाव तभी देते हैं यदि यह उपाय काम नही करते या फिर आप बहुत कम वजन के हैं।

 

अस्पताल में इलाज:-

इसमें भी खाने को नियंत्रित करने और अपनी समस्याओं के बारे में बात करना शामिल है, और अधिक देखरेख और सुरक्षित तरीके से।

  • रक्त परीक्षण किया जायेगा यह जानने के लिए कि कहीं आप में खून की कमी या संक्रमण होने का जोखिम तो नही है।
  • नियमित वजन लिया जायेगा यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका वजन धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
  • दिल, फेफड़े और हड्डियों में क्षति की निगरानी के लिए अन्य शारीरिक जांचों की जरूरत हो सकती है।

 

खान-पान की सलाह और मदद:-

  • एक आहार विशेषज्ञ आपके साथ स्वस्थ भोजन पर चर्चा कर सकते हैं - आप कितना खाना खायें और कैसे सुनिश्चित करें कि आपको स्वस्थ रहने के लिए सभी पोषक तत्व मिलते रहें।
  • आपको विटामिन की खुराक की आावश्यकता हो सकती है।
  • आप केवल अधिक खाने से एक स्वस्थ वजन को वापिस प्राप्त कर सकते हैं और शुरूआत में यह बहुत मुश्किल हो सकता है। कर्मचारी आपकी मदद कर सकते हैं -
  • वजन बढ़ाने के लिए उचित लक्ष्य निर्धारित करने में।
  • नियमित रूप से खाने के लिए।
  • चिंता या परेशानी का सामना करने में।

केवल वजन बढ़ना पूर्ण रूप से ठीक होना नही है - परन्तु वजन बढ़ाये बिना ठीक होना भी संभव नही है। वे लोग जो गंभीर रूप से भूखे होते हैं आमतौर पर ध्यान केंद्रित करने और विशेषकर अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी महसूस करते हैं।

 

अनिवार्य उपचार:-

       इसका प्रयोग असामान्य है। इसका प्रयोग उनमें किया जाता है जो इतने अस्वस्थ है कि -

  • वह स्वयं के लिए उचित निर्णय नहीं ले सकते।
  • उन्हें गंभीर नुक्सान से संरक्षित करने की जरूरत हो।

 

यह उपचार कितना प्रभावी है?:-

  • आधे से अधिक मरीज पूर्ण रूप से ठीक हो जाते हैं। हालांकि वे औसत पर 5 से 6 साल के लिए बीमारी से ग्रसित रहते हैं।
  • 20 साल से गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों में भी पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना है।
  • अस्पताल में भर्ती सबसे गंभीर मरीजों पर हुए पिछले अध्ययनों से पता चला है कि इनमें से 5 में से 1 की मृत्यु हो सकती है। आधुनिक देखभाल और लगातार चिकित्सा देखभाल के संपर्क में रहने से मृत्यु की दर कम होती है।
  • यदि दिल और अंगों को कोई क्षति नहीं पहुंची हो और व्यक्ति पर्याप्त खाना खाने लगे तो भुखमरी की जटिलताओं में धीरे-धीरे सुधार आने लगता है।

 

बुलीमिया (Bulimia) के लिए:-

मनोचिकित्सा (Psychotherapy)

बूलीमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa) में दो प्रकार की मनोचिकित्सा प्रभावी है। यह दोनो 20 सप्ताह तक, एक सप्ताह के अंतराल पर दी जाती हैं।

 

संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (C.B.T.)

यह आम तौर पर एक चिकित्सक, स्वयं सहायता किताब के साथ, समूह सत्र में या फिर सी डी रोम के साथ की जाती है। सी.बी.टी. आपको अपनी भावनाओं और विचारों को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करती है। आप अपने खाने की आदतों को एक डायरी में लिख कर जान सकते हैं कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जो आपको अधिक खाने पर मजबूर करती हैं। इस तरह आप इन स्थितियों या भावनाओं से निपटने के बेहतर तरीके अपना सकते हैं। ऐनोरेक्सिया के उपचार की तरह ही इसमें भी चिकित्सक आपको अपने महत्व को पुनः समझने और प्राप्त करने में मदद करेगा।

 

पारस्परिक थेरेपी (I.P.T.)

यह थेरेपी भी एक चिकित्सक के साथ की जाती है, परन्तु इसमें अन्य लोगों के साथ आपके संबंध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित होता है। आपने एक मित्र खो दिया हो, आपके किसी परिजन की मृत्यु हो गयी हो या फिर आपके जीवन में एक बड़ा परिवर्तन आया हो जैसे कि जगह का बदलना। यह आपके सहायक रिश्तों के पुर्ननिर्माण में आपकी मदद कर सकती है ताकि आप अपनी भावनात्मक जरूरतों के लिए खाने पर निर्भर न रहें।

 

खान-पान की सलाह

यह आपकी पुनः नियमित रूप से खाना खाने में मदद करती है ताकि आप भुखमरी और उल्टी के बिना एक स्थिर वजन बनाए रखें। एक आहार विशेषज्ञ आपको स्वस्थ खान-पान की सलाह दे सकते हैं। "Getting bite by bite" जैसी पुस्तक/Guide आपके लिए सहायक हो सकती है। (संदर्भ देखें।)

 

दवा का इलाज:-

यदि आप अवसाद/उदासी से ग्रसित न भी हों तब भी फ्लूओक्जेटीन (प्रोजेक) की ज्यादा खुराक से अत्यधिक खाने की इच्छा को कम किया जा सकता है। यह 2-3 सप्ताह में आपके लक्षणों को कम करने व मनोचिकित्सा की शुरूआत करने में सहायक हो सकता है। दुर्भाग्यवश अन्य तकनीकों की मदद के बिना कुछ समय बाद इसके द्वारा प्राप्त लाभ खत्म होने लगते हैं।

 

यह उपचार कितना प्रभावी है?:-

  • लगभग आधे पीड़ित ठीक हो जाते हैं और अपनी अत्यधिक खाने (Bingeing) और रेचक (Purging) की आदत आधी कर देते हैं। यह एक पूर्ण इलाज नही है परन्तु यह आपके जीवन को पुनः नियंत्रण में लाने के लिए व खाने की समस्या से कम से कम हस्तक्षेप होने में आपकी मदद करता है।
  • परिणाम ज्यादा गंभीर होता है यदि आप ड्रग्स (नशे), शराब व खुद को नुक्सान पहुंचाने की समस्या से ग्रसित हों।

हालांकि सी.बी.टी. का असर जल्दी शुरू हो जाता है परन्तु सी.बी.टी. व आई.पी.टी. दोनो एक वर्ष के बाद समान रूप से प्रभावी हैं।

  • ऐसा सबूत मिला है कि दवा और मनोचिकित्सा का संयोजन, अकेले दवा या मनोचिकित्सा की तुलना में अधिक प्रभावी है।
  • मरीज धीरे-धीरे ठीक होता है और पूर्ण रूप से ठीक होने में कुछ महीनों से कई साल तक लग सकते हैं।

 

For a list of references and further reading visit the English version of this leaflet.

 


 

RCPsych logo

The original leaflet was produced by the RCPsych Public Education Editorial Board.

Series Editor: Dr Philip Timms.

Hindi Adaptation by Dr Anil Nischal, Dr Adarsh Tripathi & Dr Anju Agarwal

Reviewed by Dr Ashok Kumar Jainer & Dr Manu Agarwal

Date of original leaflet: July 2008.  Date of translation: November 2011

 

© November 2011 Royal College of Psychiatrists. This leaflet may be downloaded, printed out, photocopied and distributed free of charge as long as the Royal College of Psychiatrists is properly credited and no profit is gained from its use. Permission to reproduce it in any other way must be obtained from the Head of Publications. The College does not allow reposting of its leaflets on other sites, but allows them to be linked to directly.

The Royal College of Psychiatrists, 17 Belgrave Square, London, SW1X 8PG.    

Charity Registration Number 228636 in England and Wales and SC038369  in Scotland

 

Login
Make a Donation